नियमावली

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की नियमावली के नियम-18 द्वारा, प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए श्री राज्यपाल उक्त नियमावली के स्तम्भ-1 में उल्लिखित वर्तमान नियमों के स्थान पर स्तम्भ-2 में उल्लिखित नियम प्रतिस्थापित किये जाने की अनुमति प्रदान करते हैं -

स्तम्भ-1

वर्तमान नियम

 

स्तम्भ-2

एतद्द्वारा प्रतिस्थापित नियम

नियम-2
  संस्थान अर्थात उसके सामान्य परिषद के निम्नलिखित सदस्य होगें :-     संस्थान अर्थात उसके सामान्य परिषद के निम्नलिखित सदस्य होगें :-
(1) अध्यक्ष   (1) अध्यक्ष
(2) व (3) दो उपाध्यक्ष   (2) एक उपाध्यक्ष
  (3) प्रमुख सचिव/सचिव/ भाषा विभाग उ0प्र0 शासन या उनके प्रतिनिधि
(4) प्रमुख सचिव/सचिव भाषा विभाग उ0प्र0 शासन या उनके प्रतिनिधि।   (4) सचिव, सांस्कृतिक कार्य विभाग, उत्तर प्रदेश शासन या उनके प्रतिनिधि।
(5) सचिव, सांस्कृतिक कार्य विभाग, उत्तर प्रदेश शासन या उनके प्रतिनिधि।   (5) सचिव, वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश शासन अथवा उनके प्रतिनिधि।
(6) सचिव, वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश शासन अथवा उनके प्रतिनिधि।   (6) कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
(7) कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी   (7) उपनिदेशक, संस्कृत शिक्षा, इलाहाबाद
(8) उपनिदेशक, संस्कृत शिक्षा, इलाहाबाद   (8) से (15) आठ व्यक्ति, जिनमें से कम से कम तीन व्यक्ति अनिवार्यत: उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय में संस्कृत विभागों के शिक्षकों में से होगें तथा दो आचार्य स्तर तक की मान्यता प्राप्त प्रथम श्रेणी की परम्परागत संस्कृत पाठशालाओं के प्रचार्यो में से होगें, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत किये जायेगे।
(9) से (16) आठ व्यक्ति, जिनमें से कम से कम तीन व्यक्ति अनिवार्यत: उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय में संस्कृत विभागों के शिक्षकों में से होगें तथा दो आचार्य स्तर तक की मान्यता प्राप्त प्रथम श्रेणी की परम्परागत संस्कृत पाठशालाओं के प्रचार्यो में से होगें, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत किये जायेगे।   (16) से (18) तीन प्रतिनिधि प्रदेश की ऐसी विभिन्न संस्थाओं के होगें, जो संस्कृत प्रचार-प्रसार में रत हो और जिन्हें सामान्य परिषद द्वारा चुना जायेगा।
(17) से (19) तीन प्रतिनिधि प्रदेश की ऐसी विभिन्न संस्थाओं के होगें, जो संस्कृत प्रचार-प्रसार में रत हो और जिन्हें सामान्य परिषद द्वारा चुना जायेगा।   (19) से (23) संस्कृत के पांच विद्वान जो अपनी व्यक्तिगत हैसियत से सामान्य परिषद द्वारा चुने जायेगे।
(20) से (24) संस्कृत की पांच विद्वान जो अपनी व्यक्तिगत हैसियत से सामान्य परिषद द्वारा चुने जायेंगे।   (24) कोषाध्यक्ष और
(25) कोषाध्यक्ष और  

(25)

निदेशक उ0प्र0 संस्कृत संस्थान
(26) निदेशक उ0प्र0 संस्कृत संस्थान      
नियम - 3

(1)

प्रतिबन्ध यह है कि इस संस्थान के गठन की तिथि से तीन वर्षो के लिए इस संस्थान के सामान्य परिषद के समस्त गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन उत्तर प्रदेश शासन द्वारा किया जायेगा।   (1) प्रतिबन्ध यह है कि इस संस्थान के गठन की तिथि से एक वर्ष के लिए इस संस्थान के सामान्य परिषद के समस्त गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन उत्तर प्रदेश शासन द्वारा किया जायेगा।

(4)

गैर - सरकारी सदस्यों की दशा में उनकी सदस्यता का कार्यकाल उनकी नियुक्ति से तीन वर्ष का होगा किन्तु किसी ऐसे सदस्य का पुन: मनोनयन / निर्वाचन, जैसी भी स्थिति हो, हो सकेगा।   (4) गैर - सरकारी सदस्यों की दशा में उनकी सदस्यता का कार्यकाल नामित किये जाने की तिथि से एक वर्ष का होगा।
नियम - 4

(1)

संस्थान की सामान्य परिषद के उपाध्यक्षों एवं नियम-2 के मद (17) से (19) तथा (20) से सदस्यों का चुनाव करना।   (1) संस्थान की सामान्य परिषद के नियम-2 के मध्य (16) से (18) तथा (19) से (23) में उल्लिखित गैर सरकारी सदस्यों का चुनाव करना।
नियम - 6
(क) कार्यकारिणी समिति में निम्नलिखित सदस्य होगें-   (क) कार्यकारिणी समिति के निम्नलिखित सदस्य होगें-
(1) अध्यक्ष-सामान्य परिषद के अध्यक्ष।   (1) अध्यक्ष-सामान्य परिषद के अध्यक्ष।
(2)-(3) दो उपाध्यक्ष-सामान्य परिषद के दो उपाध्यक्ष।   (2) उपाध्यक्ष
(4) से (7) चार सदस्य सामान्य परिषद में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत आठ सदस्यों में से तथा नियम-2 के मद (4) से (8) तक उल्लिखित सदस्यों में से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत किये जायेगें।   (3) से (6) चार सदस्य सामान्य परिषद में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत आठ सदस्यों में से तथा नियम-2 के मद (3) से (7) तक उल्लिखित सदस्यों में से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मनोनीत किये जायेगें।

(8)
से
(9)

दो सदस्य सामान्य परिषद द्वारा नियम- में मद (17) से (19) तथा (20) से (24) में उल्लिखित सदस्यों में से क्रमश: एक-एक चुने जायेगें।  

(7) से (8)

दो सदस्य सामान्य परिषद द्वारा नियम-2 में मद (16) से (18) तथा (19) से (23) में उल्लिखित सदस्यों में से क्रमश: एक-एक चुने जायेगें।
(10) कोषाध्यक्ष और   (9) कोषाध्यक्ष और
(11) निदेशक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान।   (10) निदेशक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान।

9(क)

अध्यक्ष की नियुक्ति सदैव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा की जायेगी। कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से यदि वह त्याग पत्र न दें अथवा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा हटाये न गये हो, तों पद का भार 3 वर्ष तक ग्रहण करेगें।   9(क) अध्यक्ष, जो कि संस्कृत भाषा एवं साहित्य का विद्वान कोई गैर-सरकारी व्यक्ति होगा, उसे राज्य सरकार द्वारा नामित किया जायेगा। कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से यदि वह त्यागपत्र न दे अथवा राज्य सरकार द्वारा न हटाया जाये तो उनका कार्यकाल एक वर्ष का होगा।
10(क) दोनो उपाध्यक्षों का चुनाव संस्थान की सामान्य परिषद द्वारा अपने सदस्यों में से किया जायेगा तथा ऐसे चुनाव की तिथि से उनका कार्यकाल तीन वर्ष होगा, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि नियमावली के नियम - 3 के खण्ड (9) के अधीन संस्थान के सामान्य परिषद का समय-समय पर पुर्नगठन किये जाने पर सदैव दोनों उपाध्यक्षों की नियुक्ति उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अपने विवेकानुसार की जायेगी तथा इस प्रकार नियुक्त किये गये उपाध्यक्षों का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से तीन वर्ष होगा।   10(क) संस्थान में दो उपाध्यक्षों के स्थान पर अब केवल एक पूर्ण कालिक उपाध्यक्ष होगा, जो कि संस्कृत भाषा एवं साहित्य का विद्वान कोई गैर-सरकारी व्यक्ति होगा, उसे राज्य सरकार द्वारा नामित किया जायेगा। कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से यदि वह त्याग पत्र न दे अथवा राज्य सरकार द्वारा न हटाया जाये तो उनका कार्यकाल एक वर्ष का होगा।

उपरोक्त के अतिरिक्त उ0प्र0 संस्कृत संस्थान की नियमावली यथावत् रहेगी।